गौसे आज़म का कश्ती निकालने का वाक़या।

करामत ए गौसे आज़म 

Baghdad Shareef - Deeni Knowledge

एक मर्तबा सरकार गौसे आज़म शेख अब्दुल कादिर जिलानी र.अ. दरिया किनारे गए और दरिया किनारे देखा कि एक बुढ़िया मटका नीचे रखकर आंसू पोछने लगी तो गौसे पाक ने खादिम से कहा जा और पूछ उससे की वो रोती क्यों है तो खादिम जाकर उस बुढ़िया से पूछता है ए अम्मा तू रोती क्यों है तो वो बुढ़िया कहती मेरे रोने से तेरा क्या ताल्लुक यह कहकर वह नहीं बताती है। फिर गौसे पाक खुद जातें हैं और पूछते हैं कि ए मायी तू क्यों रोती है तो वह कहती है कि ए जवान रोने की वजह यह कि मेरा इकलौता बेटा था बचपन मे वो यतीम हो गया था और जवानी मे में बेवा हो गयी थी फिर मेने ही उसकी परवरिश की और में उसकी शादी करना चाहती थी मेरा मज़हब ईसाइयत है और में दरिया के उस पार बहु लाने गयी थी सभी बाराती बारात लेकर लौट रहे थे और जब कश्ती किनारे को लगी तो में और चंद लोग उससे उतरे तो एक हवा का झोंका आया और वह कश्ती बीच दरया में जा पहुँची और मेरी आँखों के सामने मेरे बेटे की बारात दरया में डूब गयी
गौसे पाक र.अ. फरमातें हैं रुक अभी तेरा इंतजाम होगा तो वह बुढ़िया हैरत से कहने लगी ए जवान मेरे बेटे की कश्ती डूबे हुए 12 साल हो गए हैं कौनसा इंतजाम तू करेगा गौसे पाक ने कहा मेरे अल्लाह की क़ुदरत देख फिर गौसे पाक ने दो रकाअत नमाज़ पढ़ी और दुआ के लिए हाथ उठाये ए अल्लाह इसके बेटे की बारात को वापस करदे तो अल्लाह का हुक्म आया ए अब्दुल कादिर उसको 12 साल बीत गए हैं उस कश्ती के सवारों को जिन मछलियों ने खाया और उन मछलियों को लोगो ने खाया लोग खाकर उसे हज़्म कर गए और और फुसलाद बन गए और फुसलाद को जमीन के जानवरों ने खाया और वह मिट्टी में मिल गए कहाँ की खाद कहाँ पहुँची।
गौसे पाक ने फरमाया ए अल्लाह मुझे मेहबूब जो बनाया है मेने इस बुढ़िया के सामने दावा किया है मुझे रुस्वा न करना! तो इरशाद हुआ वह कहाँ से कहाँ पहुँचे और तू कहता है कि वापस करदे।

रिवायतों में आता है कि गौसे पाक ने अपना जुब्बा उतारा और फरमाया ए अल्लाह जब तक वह बारात वापस नही होगी अब्दुल कादिर तेरी कसम खाकर कहता कि में कभी कपड़े नही पहनूंगा तो इरशाद हुआ ए अब्दुल कादिर पहन ले तुझे मेरी कसम और अब तू मेरी क़ुदरत का करिश्मा देख तो आपने वह जुब्बा हाथ मे लिया पहना नही और फरमाया जब तक वह कश्ती वापस नही आ जाती में पहनूंगा नही

फिर चंद लम्हो में वह कश्ती जिस जगह से डूबी थी उसी जगह से बाहर आयी और जैसे गाती-बजाती डूबी वैसे ही किनारे को लगी और उस बुढ़िया ने अपना बेटा देखा और इस करामत को देखकर उस मुकाम पर 500 से ज्यादा लोगों ने इस्लाम कबूल किया।
गौसे पाक ने फरमाया अल्लाह मुझे 3 बार ये कश्ती निकालने की बात क्यों कहनी पढ़ी तो फरमाया अब्दुल कादिर हम जानते हैं जो तूने कहा वो तो होना ही है दरअसल तीन बार इस लिए बात दोहराई की जब
पहली बार तूने कहा तो ज़मीन के अंदर जो कीड़े मिल चुके थे हमने उन कीड़ों मे से उन्हें बाहर निकाला!
दूसरी मरतबा हमने मछलियों के पेट मे से उन्हें निकाला!
और तीसरी मरतबा हमने उनको नई ज़िन्दगी अता कर दी।
इस करामत पर एक शेर मशहूर है "निकाला था पहले तो डूबे हुओं को और अब डुबतों को बचा गौसे आज़म"

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