शबे बारात Shab e Barat - गुनाहों से निजात पाने वाली रात ।

शबे बारात की फ़ज़ीलत

अल्लाह तआला का बहुत बड़ा एहसानों करम है कि उसने हमें गुनाहों से निजात पाने वाली रात (शबे बारात) अता की ! इस रात को हम ज्यादा से ज्यादा तौबा करें।

कुरआन :- जो तौबा नहीं करते वो बहुत बड़े जालिम है।
हदीस :- जिसने सच्चे दिल से तौबा करली वो ऐसा हो गया जैसे अभी - अभी मां के पेट से पैदा हुआ हो! यानी अल्लाह तआला उसके सारे गुनाह माफ कर देगा।

अल्लाहुम्मा इन्नाका अफ्फुवुन तोहिब्बुल अफवा फाफू अन्नी या गफुरो या गफुरो या गफुरो।

इस रात को आदमी की ज़िंदगी का हिसाब - किताब लिखा जाता है! किसकी जिंदगी कितनी है, किसको कितना रिज़्क़ मिलेगा, किसको औलाद होगी, किसको नहीं, बारिश कितनी होगी वगैरह! यानी पूरे साल का हिसाब - किताब लिखा जाता है ।
इस रात को हम बाज़ारों में, सड़कों पर, मोटर साइकिलों पर इधर-उधर नहीं गुज़ारें न किसी पड़ोसी भाई को परेशान करें! इस रात को हम ज्यादा से ज्यादा तौबा अस्तग़फ़ार, दुरूद शरीफ, सूरह यासीन, नवाफिल पढ़ें।

शबे बारात की नमाज़ का तरीका


1. मगरिब की नमाज़ के बाद ग़ुस्ल करके 2 रकाअत नमाज़ तहिय्यातुल वुज़ू पढें! उसके बाद 8 रकाअतें निफल नमाज़ 4 सलाम से अदा करें! हर रकाअत में अल्हमदो के बाद सूरह इख्लास (कुल्हो अल्लाहो अहद) पाँच बार पढ़ें।

2. चार रकाअत नमाज़ नफिल एक सलाम से पढ़ें! हर रकाअत में अल्हमदो के बाद इन्ना अन्जलना एक बार, सूरह इख्लास 27 बार पढ़ें।

3. जो कोई इस्लामी भाई या बहन इस रात में 4 रकाअत इस तरह पढ़ें की हर रात में अल्हमदो शरीफ के बाद सूरह तकासुर (अल्हाको मुत्ताकासुर) 1 बार और सूरह इख्लास 11 बार पढ़े तो अल्लाह तआला उसको सकराते मौत से आसानी फरमाएगा नेज अजाबे कब्र से महफूज़ फरमाएगा और नूर के 4 ऐसे सूतून अता फरमाएगा कि हर सुतून में एक हजार महल अता फरमाएगा।

4. इस रात में जो कोई इस्लामी भाई या बहन 20 रकाअतें इस तरह पढ़ें कि हर रकाअत में सूरह फातिहा के बाद 21 बार सूरह इख्लास पढे तो वह अपने गुनाहों से इस तरह पाक हो जाएगा गौया कि अभी अपनी माँ के पेट से पैदा हुआ हो और अल्लाह तआला उसके लिए जन्नत में एक शहर बनवायेगा और इस शहर में इस कदर हुर होगी कि उनका शुमार सिर्फ अल्लाह तआला को ही मालूम है।

5. जो कोई इस्लामी भाई या बहन इस रात में 4 रकाअत नफिल नमाज पढे और हर रकाअत में सुरह फातिहा के बाद सुरह कद्र (इन्ना अनजलना) 3 बार पढे सूरह इखलास 50 बार पड़े आर सलाम फेरने के के बाद सजदे में जाकर एक बार यह दुआ पढे (सुभानल्लाहे वलहमदो लिल्लाहे वलाइलाहा इल्ललाहो वल्लाहो अकबर) फिर दुआ मागे तो अल्लाह तआला उसकी दुआ कबूल फरमाएगा और अल्लाह तआला उसे बेशूमार नेअमतों से सरफराज फरमाएगा और उसके तमाम गुनाह माफ फरमा देगा।

6. जो इस्लामी भाई या बहन इस रात की रात में 2 रकाअत नमाज नफिल इस तरह पढे की हर रात में सूरह फातिहा के बाद सूरह इख्लास 7 बार पढ़ें! और सलाम फेरने के बाद 70 बार ''अस्तगफेरुल्लाह रब्बी मीन कुल्ले ज़मबीव व आतुबु इलयहै" पढ़ें! तो अपनी जगह से उठने से पहले अल्लाह तआला उसको आर उसके माँ बाप का बख्श देगा और अल्लाह तआला फरिश्तों को हुक्म देता है जन्नत में उसके लिए बाग लगा दो, उसके लिए मकान बना दो और नहरे जारी कर दो यह दुनिया से नहीं जाता जब तक यह सब नहीं देख लेता।

शाबान की 14वीं व 15वीं तारीख का रोज़ा रखना अफ़ज़ल है।

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