नमाज़े ज़नाज़ा की फ़ज़ीलत और तरीक़ा।

नमाज़े ज़नाज़ा


दुनिया मे हर इंसान की जिंदगी और मौत तय है ! वक़्त आने पर उसे चंद लम्हों की भी मोहलत नही दी जाती! अल्लाह तआला क़ुरआन में फरमाता है: 
जब किसी का वक़्त आ जाता है तो उसका एक सेकंड भी आगे पीछे नही हो सकता फिर अल्लाह तआला उसे हरगिज़ मोहलत नही दे सकता मौत का मज़ा सबको चखना है।
मरने के बाद जितनी जल्दी हो सके मुर्दे को ग़ुस्ल व कफन के बाद जितनी जल्दी हो सके नमाज़े जनाज़ा का का एहतमाम करना चाहिए।
नमाज़े ज़नाज़ा फर्ज़े किफाया है यानी अगर दो चार लोग भी पढ़ लें तो फ़र्ज़ अदा हो जाएगा लेकिन जिस क़दर भी ज़्यादा आदमी हों उसी क़दर मुर्दे के हक में अच्छा है क्योंकि न मालूम किस की दुआ लग जाए और मुर्दे की मगफिरत हो जाए।

                

नमाज़े ज़नाज़ा की नीयत व तरीका


नियत करता हूँ मैं नमाज़े ज़नाज़ा पढ़ने की चार ताक़बीरों के साथ वास्ते अल्लाह तआला के दुआ वास्ते इस मय्यत के दुरूद मुहम्मद सल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम पर इस इमाम के पीछे मुँह मेरा काबा शरीफ की तरफ अल्लाहु अकबर।
अल्लाहु अकबर कहते हुए कानों तक हाथ उठाकर नाफ़ (नाभी) के नीचे हाथ बांध लें फिर पढ़े:

सना :- सुब्हा न कल्लाहुम म व बिहम्दि क व तबार-कस्मू क व तआ-ल-जदुका व जल्ला सनाउका व लाइलाहा गैरूक।

फिर यह पढ़ें : 

दरूद शरीफ : अल्लाहुम्मा सल्लेह अलह मुहम्मदिन व आला आले मुहम्मदिन कमा सल्लेहत अला इबराहिमा व अला आले इबराहिमा इन्नाक हमीदुम्मज़िद अल्लहुम्मा बारिक अला मुहम्मदिन व अला आले मुहम्मदिन कमा बारकता अला इबराहीमा, व अला आले इबराहीमा इन्नाक हमीदुम्मज़िद 

फिर दुआ पढ़ेः
अल्लाहुम्मग फिर लि हैयिना व मय्यतेना व शाहिदिना व गाइबिना व सगीरिजा व कबिरिना व ज-क-रिना व उन्माना अल्लाहुम्मा मन अहयै तहू मिन्ना-फ-अहयिही अलल इस्लाम व मन तवफ्फै तहू मिन्ना फ-तवफ्फहू अलल ईमान।

अगर मय्यत नाबालिग लड़के की है तो यह दुआ पढ़ेः

'अल्लाहुम मजअल हु लना फरतंव वज़ अल हु लना अजरंव व जुख एंव वजअलहु लना शाफिअव व मुशफ्फआ ।

अगर मय्यत नाबालिग लड़की की है तो यह दुआ पढ़ेः

अल्लाहुम मजअल हा लना फटतंव वज़ अल हा–लना अजरंव व जुख व वजअलहा-लना शाफितव व मुशफ्फअह।

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1 comments:

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Loktp
admin
April 21, 2019 at 9:59 PM ×

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Congrats bro Loktp you got PERTAMAX...! hehehehe...
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