इस्लामी अख़लाक़ और आदाब हिंदी में।

इस्लामी अख़लाक़ और आदाब - दीनी नॉलेज

खाने के आदाब


हदीस : रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि जिस खाने पर बिस्मिल्लाह न पढ़ी जाए शैतान के लिए वह खानाह लाल हो जाता है यानी बिस्मिल्लाह न पढ़ने की सूरत में शैतान उस खाने में शरीक हो जाता है।

नबीये करीम हज़रत मुहम्मद ﷺ ने इरशाद फरमाया : खाने के वक्त जूते उतार लो कि यह सुन्नते जमीला है और हजरत अनस रदियल्लाहु तआला अन्हु की रिवायत में है कि खाना रखा जाए तो जूते उतार लो कि इस से तुम्हारे पाँव के लिए राहत है।

मसअला : मुसलमानों के खाने का तरीका यह है कि फर्श वगैरा पर बैठ कर खाना खाते हैं, मेज कुर्सी पर खाना नसारा का तरीका है, इससे बचना चाहिए, बल्कि मुसलमानों को हर काम अपने बुज़ुर्गों के तरीके पर करना चाहिए, गैरों के तरीके को हरगिज इख्तियार नहीं
करना चाहिए।

पानी पीने के आदाब 


हदीस: रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद कि एक साँस में पानी न पियो जैसे ऊँट पीता है, बल्कि दो और तीन मर्तबा में पियो और पीने से पहले बिस्मिल्लाह पढ़ लो और जब बर्तन को मुहँ से हटाओ तो अल्लाह की हम्द करो।

रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया : खड़े होकर हरगिज़ कोई शख्स पानी न पिये और जो
भूल कर ऐसा कर गुजरे वह कय (उल्टी) कर दे।
पानी बिस्मिल्लाह कह कर दाहिने हाथ से पिये और तीन साँस में पिये, हर मरतबा बर्तन को मुँह से हटा कर साँस ले, पहली और दूसरी मरतबा एक-एक बूंट पिये और तीसरी साँस में जितना चाहे पी ले, इस तरह पीने से प्यास बुझ जाती है और पानी को चूस कर पिये, गट गट बड़े बड़े पैंट न पिये, जब पी चुके हों तो “अल्हम्दुलिल्लाह” कहे, इस जमाने में कुछ लोग बायें हाथ में कटोरा या गिलास लेकर पानी पीते है, खास तौर पर खाने के वक्त दाहिने हाथ से पीने को तहजीब के खिलाफ जानते है, उनकी यह तहजीब ईसाइयों का तरीका है, इस्लामी तहजीब दाहिने हाथ से पीना है।
 आजकल एक तहजीब यह भी है कि गिलास में पीने के बाद जो पानी बचा उसे फेंक देते हैं, कि अब वह पानी झूटा हो गया जो दूसरे को नहीं पिलाया जाये, यह गैरों से सीखा हैं, इस्लाम में छूत छात नहीं, मुसलमान के झूटे से बचने का कोई मतलब नहीं और इस वजह से पानी को फेंकना फिजूलखर्ची है।

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