नमाज़ की शर्तें क्या-क्या हैं।

नमाज़ पढ़ना हम पर फ़र्ज़ है लेकिन आपको पता है नमाज़ के सही होने की 6 शर्तें होती है अगर नमाज़ इन शर्तों के मुताबिक अदा की जाए तब ही नमाज़ मानी जाती है आज हम आपको नमाज़ की 6 शर्तें बताने वाले हैं तो आइए शुरू करतें हैं

Namaz - Deeni Knowledge

नमाज़ के सही होने की 6 शर्तें हैं :-


1. तहारत (पाकी)
2. सत्रे औरत (बदन का वह हिस्सा जिसका ढकना फ़र्ज़ है)
3. इस्तिकबाले किबला (यानी किबला की तरफ मुँह होना)
4. वक़्त
5. नियत
6. तकबीरे तेहरिमा

1. तहारत: यानी नमाज़ी के बदन का हदसे अकबर व असगर और नजासते हकिकिया से पाक होना, उसके कपड़े और उस जगह का जिस पर नमाज़ पढ़ी नजासत से पाक होना, हदसे असगर यानी वो काम जिनसे वुज़ू जाता रहता है और उनसे पाक होने का तरीका ग़ुस्ल व वुज़ू के बयान में गुज़रा।
मसला: किसी शख्स ने अपने को बे वुज़ू गुमान किया और उसी हालत में नमाज़ पढ़ ली बाद को जाहिर हुआ कि बे वुज़ू था नमाज़ न हुई।

2. सत्रे औरत: यानी बदन का वह हिस्सा जिसका छुपाना फ़र्ज़ है उसको छुपाना।

3. इस्तिकबाले किबला: यानी नमाज़ में किब्ला यानी काबा की तरफ मुँह करना।

4. वक़्त: नमाज़ पढ़ने के लिए वक़्त जिस वक़्त की नमाज़ पढ़ रहे हैं उस वक़्त का होना जरूरी है।

5. नियत: नमाज़ पढ़ने से पहले हमें नमाज़ की नीयत करनी चाहिए तब ही नमाज़ अदा होती है

6. तकबीरे तेहरिमा: यह नमाज़ मे फ़राइज़ है इसमे अल्लाहु अकबर कहकर हाथों के दोनों अंगूठों को कानों से लगाकर छोड़ते हैं

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